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Showing posts from 2016

गीत जात सपाखरु महादेव जी रो दीप चारण कृत

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गीत जात सपाखरु महादेव जी रो दीप चारण कृत डमा डमा  डमाक  गूंजावते डमरू डणकांरा, त्रिकाल  त्रिलोक धरा पताल आकाश। भक्तांरा असुरांरा अघोरांरा आराध्य भोला, करतांह कूदा कूद धूजावे कैलाश।।  1 गले मूंड माला पाण त्रिशूल विशाला जटा गंग, बहे कल्ल कल्ल भोला सुभाव बहाव। दिगम्बर बाघाम्बर पैर पीर पैगाम्बर ओप्ता, ज्टाला जोराला दाड़ी मूछ वाला दे ताव।।  2 चंद्रभाल नेत्रलाल भंगगाल पी करे कमाल, भोलो भूताॅ रो प्रेताॅ रो मसाणाॅ रो भूप। अंगा अंगा भुजंगा फूंकांरा जटा बहे गंग धारा, अघोरा उम्या प्यारा थांरा रूप अनूप।। 3 कालकाल महाकाल ललाटाक्ष कपाली कामारी त्रिपुरारी सोम नीलकंठ  त्रिलोकेश । सुत हेक दंत अंश हनूमंत पूजे सब संत, विश्वेश्वर वीरभद्र भीम व्योमकेश ।।  4 हिमालै रा जमाता कार्तिकेय ताता हिरण्यरेता, वृषांकं वृषभारूढा देव वामदेव। मृगपाणी शूलपाणी गुंजे डिमं डिमं वाणी, मृत्युंजय पंचवक्त्र रूद्र महादेव।।     5 रूप धरे द्वादश्श गांजे रा ले कस्स बस्स विराने, तूं ही नव रस्स थांरो जग गावे जस्स । भुजंगा अंगा अंगा रमे मस्त मलंगा भर्ग भमे । घ...

माधव मेरे मीत

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मन्न मनोहर मोहके, मुस्कात तु टँग भींत। बैण दो बोल बन्तला, माधव मेरे मीत।। छंदा दोहा सोरठा, गा नी जाणू गीत। बैण दो बोल बन्तला, माधव मेरे मीत।। प्यासो पंछि पुकारतो, पाल मन्न में प्रीत। बैण दो बोल बन्तला, माधव मेरे मीत।। सुनकर दिल में दबा, मंद मंद संगीत । बैण दो बोल बन्तला, माधव मेरे मीत।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण मन वन कहुके मोर, विरह री घिरी बादली। समीर सम कर शौर, मंद मंद आ माधवा।। मम मन होय मसाण, मरण लगा अरमान अब। राधा री है आण, मोड़ो मत कर माधवा।। आवन तजू न आश, पथ तक तक नैन थकिया। बूझा अखियन प्यास, कर मत मोड़ो केशवा।। इर्द-गिर्द (हो) आभास, गर कण कण तुम बसे। दीप ने दिखा (दे) रास, मोड़ो मत कर माधवा।। चुग चुग आखर चंद, माला बणावण म्हुँ खपूं। जाणूं न कोय छंद, सब थूं जाणे सांवरा।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण

अन्य कवियों के गीत सपाखरो

गीत – सपाखरो देवां दातारां जूझारां चारां वेदां अवतारां दशां, धरां हरां ग्यारां रवि बारां चारां धांम।। सतियां जतियां सारां सुरां पुरां रिषेसरां, पीरां पैगम्बरां सिद्ध साधकां प्रणाम।।१।। नवां नाथां नवां ग्रहां नवसो नवाणुं नदी, नखत्रां नवेही लाखां भाखां नवे निद्ध।। पर्वतां आठ कुळां वसु आठ वंदां पाव, साठ आठ तिरथां समेतां आठ सिद्ध।।२।। सात वारां सातविसां नखत्रां सरग्गां सात, सप्त समुदरां सात पेयाळां तत सार।। पुरांणां अढारां भारां अढारां वनस्पति, ऊच्चरां आदिनाथ औमकार।।३।। पारस कल्पतरू चंद्र सुर दिगपाळ, पृथ्वी आकाश पाणी पावक पवन्न।। कैलाशवासी ईश कुबेर नमस्कार, ब्रहमा गणेश शेष खगेश विसन्न।।४।। अयोध्या मथुरा माया काशी कांची अवंतिका, पुरी द्वारामति सरसति गंगा पार।। गौदावरी जरी रेवा गौमती प्रयाग गया, कावेरी सरजु मही बद्री कैदार।।५।। सौमवल्ली चिन्तामणी रोहिणी सुभद्रा सोहां, सावित्री गायत्री गीता अरूधन्ती सीत।। कामधेनु श्री अदिती रंदल द्रौपदी कुन्ती, पार्वती सति तारा लोचन पवीत।।६।। चौरासी चारणी देवी छप्पन कोटि चामुण्डा, माता हिंगळाज आशापुरा महामाय।। अंबिका कालिका...

अपसरा इठोत्तरी दीप चारण कृत

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साद सांभले सारदा , शब्दां रो दो सार । मेट'र अवगुण मावड़ी ,धर जिह्वा रै धार ।। धर जिह्वा रै धार , कंठ सू निकले कविता । आखर देय अपार , सुरा री बहाय सरिता ।। तेज अरक रो अब्ब , भाल ऊपर यूं भरदे । सुधरे कारज सब्ब , विनती सांभल सारदे  ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण अलबेली हे अपसरे गन्धर्वां सूं गवाय, ईठलाकर इठोत्तरी । मधुरं वाद्य बजाय, अलबेली हे अपसरे।।  1. नट बन करती नृत्य , गान सुन गन्धर्व का । नव योवना तुं नित्य , अलबेली हे अपसरे ।। 2. नाचती चहूं ओर, आंगण अम्बर आपरो । अदाऐं आठ पोर, अलबेली हे अपसरे।।  3. भर कर मन में मौज, नुपुर बजा लुक जावती। देव सब रया खोज, अलबेली हे अपसरे।।  4. सुमधुर सँगीत शौर , नृत्य संग जो सुने । होवत भाव विभोर , अलबेली हे अपसरे ।। 5. ता- ता-धीं-ना तान , तगड़ि तराना ताल हैं । गुनगुनात नच गान , अलबेली हे अपसरे ।। 6. छमम छम छम छमाक, बिछिया बजाय बाजणा । धरां पग धर धपाक, अलबेली हे अपसरे ।।  7. गन्धर्व गान सुन्न , थिरकत पद आनंद में । नच नीलकंठ धुन्न , अल...

मां हिंगलाज आवड़ करणी

हिये बसे हिंगलाज आफत आंधी आवतां , लाल री रखे लाज । आप बिना नी आसरो , हिये बसे हिंगलाज ।। टैम तोड़तो टांगड़ा , बैरी आय न बाज़ । बदन कर दे बज्र रो , हिये बसे हिंगलाज ।। डुंगर वाली डोकरी , तखत ना मांगु ताज । बिनती इती ज बाल री , हिये बसे हिंगलाज ।। मेहर करदे मावड़ी , आज सुणे आवाज़  । दुखड़ा मेटो दीप रा , हिये बसे हिंगलाज ।। गिरिवर वाली गौरजा , गिरती रोके गाज । दीपतो राख दीपड़ो , हिये बसे हिंगलाज ।। आसीस दिजै अम्बिका , क़दी न बिगड़े काज । नाक नमे दीप नितरो , हिये बसे हिंगलाज ।। हथ्थ सिर रखे बिसहथी , करे दीप कविराज। रचजे कविता रातदिन , हिये बसे हिंगलाज ।। असुर दलन तूं अवतरे , सदा चारण समाज। सातूं संग सहेलियाँ , हिये बसे हिंगलाज ।। सातूं देवी संगिनी , सोल सिणगार साज़ । भैरू ने ले भैलियां , हिये बसे हिंगलाज ।। नवदिन रम नवरातरा , नच नच करती नाज । सातूं संग सहेलियाँ , हिये बसे हिंगलाज ।। हाजर हेले होवजै , बैगीह सिंह बिराज । तरणी म्हारी तारजै , हिये बसे हिंगलाज ।। मुल्ला पढ़े निज मुल्क मा , नानी कहे नमाज़ । नद्य हिंगोल नहावता , हिये बसे हिंगलाज ।। रण म...

नवल जी जोसी

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आँखां चश्मो ओपतो , धवल नवल गुरु केश । जबर उकेरे जोशिजी , हरकत हृदय हमेश ।। हरकत हृदय हमेश , ठावता कविता ठावी । साचो दे संदेस ,  भटकत न पीढी भावी । मार धूड़ में लठ्ठ , लगा दे शब्द रै पाँखां । खोलदे ज्ञान पट्ट , आंधां रै आवै आंखां ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण

मोदी अर पाक

मोदी (जे )मारे आंख , फाड़'र नक्सो सिन्ध रो । पाक (नै)सुपुद्रे खाक , करदे फौजी हिन्द रा ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण जराइ न कर जेज , अरक बण जा आकरो । मोदी फौजां भेज , पापो काटण पाक रो ।। नम नम करसी नाज , बंदो हरेक हिन्द रो । मोदी मौको आज , पापो काटण पाक रो ।। झट्ट सिर दुष्टि रा दले , दशहरे तांइ दस्स  । कटि काठी कस्स , पापोह काट इण पाक रो ।। दीवाली सों पैल ,फट्टाका बम फोड़ दो । रच रणखेतां खेल , पापो  काटण पाकरो ।। बाथां धर बंदूक , फूलतरू झट काढनै । निसाणो न जा चूक , पापो कढतां पाक रो ।। छड छरा धाड़ धाड़ , बाथां धर बंदूकड़ी । बैरि कर ताड़ ताड़ , पापो काट इण पाक रो ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण मोदी  मोटो  मारको , मारे   आंखां  मीच । नवाब सरीफ नाम को , रयो नीच को नीच ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण कवि कविता भूल्चूकियो, राजन भूल्या राज। लैणां में सब आ लगे, गिराइ नरिये (मोदी) गाज।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण

गीगा भाई बारोठ कृत गीत सपाखरो

-:वीर रामवाळा नी प्रशस्ती नूँ सपाखरूँ गीत:- सॉधा त्रोड़ीया पॉजरा वाळा सॉकळे थी बाघ छुट्या ; बॉग बोली गॉमड़ा मॉ थीये हाकबाक जुटा सिंह काळ झाळ बछुटा पेनॉग जॉणे ; तूटा आसमॉण केता फूट्या जमीतॉक!!१!! झाळॉ फाळॉ तेगवाळॉ प्रळेकाळॉ वेर जाग्या; पा'ड़वाळॉ रंग्या गाळॉ रगताळॉ पूर; ! फौजाळॉ उढ़ैळॉ वाहे वादळॉ रा नोर फरै; पड़े ताळी बँधुकॉ री वाग्यॉ रणतूर!!२!! केंकाणॉ झणँकी पड़ी ठणँकी पाखरॉ कड़ी झणँकी झरदॉ खाख उठिया जोधार ! रणँकी सिँधवॉ राग हणँकी उठीया रोगा डणँकी मामले शुरॉ करे मारमार!!३!! हनुमँत धोमवा'ने लँका ढाळ्या जेम दाह्या ; वेरी हुँदा वाळा गाळा त्रौड़िया विशेक! धोळे दि'ऐ गॉमड़ा मॉ लुँटवॉ'ने पड़े धाड़ा ; मारी धमरौळी वाळा कर्या ऐकमेक!!४!! बँध कर्या खाळै खाळॉ न चाले सागरॉ बेट तेम रूँध्या केड़े केड़ा न चाले टपाल ! लाखुँ दळॉ भड़ॉवाळा करे नको कोई लाळी; मुखबा'थी मार्या कर्या देश'रा पेमाल!!५!! हाटड़ारी बँध बारी वैपारी तो बैठा हारी; खैड़वाड़ी सुकीवाड़ी पा'वा लाग्या खून ! बसाडारी लोकडारी उगरा'री नको बारी; सीधा वाट घाट हाट पड़...

अभषेक स्क्रेच

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Abhishek charan beh charanan ke skech pr 2 panktiya दोहा -सौरठा नाक नथ्थ सिर बोरियौ , लाली अधरां लाल । घूघट री आ ओट मा ,  रही पिया पथ भाल ।। पलकां बरसे मेह , हिवड़ो खावै हुचलका । नैनन छलकै नेह , भीज्यो पथ भरतार रो ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण

करणी स्तुति त्रोटक

त्रोटक छंद रो प्रथम प्रयास कर जोड़ करे सुत मां विनती । सँवली बण आ मम मां उड़ती ।। अब  तार  तुँही  सटके  तरणी । कर  मेहर  मात  सदा  करणी ।। 1 नमतो जग माँ पकड़े पग मां  । बस माँ रग मा दिखजो दृग मां ।। अरि  दानव  मार  धरा  धरणी । कर   मेहर  मात  सदा  करणी ।। 2 चढि जांगल फौज भला भट ले । कमराण मुगल्ल चले दल ले ।। अरदास करेह बिकांण धणी । कर मेहर मात सदा करणी ।।  3 किय कोप मुगल्ल बिकाण परै । संग होय सहायक जैतसि रै ।। रथ रै जुत मात बणी सिँहणी । करि मेहर मात सदा करणी ।। 4 तुँ मलेछ मरोड़ दहाड़ दले । चपला जिम जैतलराज चले ।। रण तांडव राच रही रमती । कमरानन सेन भजे डरती ।। 5 अठपोर बटोर सुवर्ण  रहे । कविराज बिराज कथाह कहे ।। हदपार फँदा विपदा हरणी । कर मेहर मात सदा करणी ।। 6 °°°°°°°°°°°°°°दीप चारण

कविता सावण आया

डाढाली हे डोकरी

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जगदंब जुनी जोगणी, जगाउं हिवड़े जोत । तरणी करणी तारले, भमावै भव बहोत ।। शीघ्र करजो सहाय, सुत री साद सुणे  सदा। ममता मय मम माय, डाढाली हे डोकरी।। मेहर करजे मात , विपदा विघन विनासनी । सदैव रहजे साथ , किणियाणी करुणामयी ।। धर कर तुं त्रिशूल , मल्लेच्छ किताइ मारिया । धन्य देशाण धूल ,  डाढाली   रहे     डोकरी ।। नेह सूं रोप नेहड़ी , माखण मथ्यो मात । खील'र व्हेगी खेजड़ी , जातरु देवै जात ।। माला फेरी मात, नेड़ि में महादेव री । विश्व मां हि विख्यात, डाढाली हे डोकरी ।। दीप सके नी दौड़ , पग होतां थ्कां पांगलो । तक्दीर बँधन तौड़ , डाढाली   हे   डोकरी ।। करणी कोई काज , थांरे बिन अठे नी  सरे । रंक नै दिराय राज , डाढाली  हे  डोकरी ।। मुलकै माला फेर , काबा देखे कूदता । दर्शन दे बिन देर , डाढाली हे डोकरी ।। सुत नै मां संभाल , कालां बिचेउ काढनै । चिल होय'र चाल , डाढाली हे डोकरी ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण

नन्ही परी दिव्यांशी

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दिव्यांशी सिंढायच फैलाय परी पंख नै , थान तेमड़े जाय । चिबटी भरी प्रसाद चख ,उड़कर भू आय ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण मामा नानी मौसियां ,रमाय लाड लडाय । रम नानाणे रंजगी , दाता दिवा न आय  ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण उडन परी झट आय , भू नेड़ी रे भगवती। वुढड़ी माँ वतलाय, देख प्यारी दिव्यांश ने || भंवर दान जी बीठू मधुकर माड़वा कृत ⛳🙏🏼🙏🏼🙏🏼💐💐🍍🏆☎⌚📸💻 ° °°°°°

Apne maan ka main, baadshah bina sirtaaj.Apne maan ka main, baadsha bina sirtaaj.Sunkr na khilli udana, na aansu bhana.Ki sunkr na khilli udana , na aansu bhana.A dost aaj hu main ak cigrete ka mohtaaj.Fir bhi.... Apne maan ka main baadshah.......Roj yu hi cigrete pi jaya krte the , char panch.Ki Roj yu hi cigrete pi jaya krte the. Char panch...Kambkhat aaj ak phunk bhi na paye khanch.Apne maan ka main baadshah, bina sirtaaj.......Kambkhat aaj ak phunk bhi nhi paye khanch.Ki itne me kisi ne allah k naam pr rupye de diye panch.Apne maan ka main........Dard h aaj mere dil main itna ki dard h aaj mere dil main itna. ki dhuve me udau.Ji chahta h aag lga du in gumo ko, pr a dost asi machis kha se lau.8-)Deep charan8-)

Apne maan ka main, baadshah bina sirtaaj. Apne maan ka main, baadsha bina sirtaaj. Sunkr na khilli udana, na aansu bhana. Ki sunkr na khilli udana , na aansu bhana. A dost aaj hu main ak cigrete ka mohtaaj. Fir bhi.... Apne maan ka main baadshah....... Roj yu hi cigrete pi jaya krte the , char panch. Ki Roj yu hi cigrete pi jaya krte the. Char panch. . . Kambkhat aaj ak phunk bhi na paye khanch. Apne maan ka main baadshah, bina sirtaaj....... Kambkhat aaj ak phunk bhi nhi paye khanch. Ki itne me kisi ne allah k naam pr rupye de diye panch. Apne maan ka main........ Dard h aaj mere dil main itna ki dard h aaj mere dil main itna. ki dhuve me udau. Ji chahta h aag lga du in gumo ko, pr a dost asi machis kha se lau. 8-)Deep charan8-)

शहीद उमेद दान बिराई

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डिग्यो न डग पर रह अडग, नक्सल (रो ) करंता नाश। लड़तां    छोड़ी     सांस, अमर शहीद उमेदसी  ।। उर्वशी रँभा मेनका, वरवा आई वीर । चिपगी फाड़े चीर, रण में देख उमेद ने,।। बाल बंदूक बावताॅ, धाड़ धाड़ धूं धाड़ । अरियां नु आक पावतां, गी गोलि सिनो फाड़ ।। लांई बिरई (रो) लाल, हिरदे बोल जय हिंद री । भू रो उतार भाल, अर्क अस्त भ्यो उमेदसी ।। °°°°°°°°°°दीप चारण

भादवो अर विरह

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खैण खिंवावै भादवो, नींद ना आय नैण ।  प्रेयसी गयी पिहरिये, पी गयी बिरह पैण ।।  भारी बरसै भादवो, होती अणुती दैण ।  सूख गयो रै सायबो, पी गयी बिरह पैण।।  भूत भयो रै भादवो, डराय काली रैण।  बेसुध पड़यो बालमो, पी गई बिरह पैण।।  बौछार लगे बाण रे , सुहाय न कोय सैण ।  खामंद व्योह खोखलो, पी गयी बिरह पैण।।  चपला देखे छापलूं, चपला ले गी चैण  | बूझ्यो लागे दीपलो, पी गयी बिरह पैण ।।  °°°°°°°°°°°°°°°°°°°° दीप चारण दिन रा इ लाय लागती , रैणा उठती झाल । प्यारी  बैठी पिहरिये , बिरहा नाख्या बाल ।। बिरह बाहदी बेरहम , बाल बाल दे पीर । ओलूं आंधी  आवतां, नैणा  बरसे  नीर ।। भूंडो बित्यो भादवो , ओ आयो आसोज । सजनी याद सतावती , रात रात भर रोज ।। कैकी कोयल कागला , कूक कूक कुरलाय । हिवड़ो खावत हुचलका , हूक हूक हुलराय ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° दीप चारण साजन आयो हे सखी ,सोला कर सिणगार । नाह हटाऐ ना नजर , सजदे ऐसे नार ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण

सांवरिये रा सबद

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कंस करे घण कोड , देय वसुदेव देवकी । फुटो गगन कन फोड़ ,काल आवसी कालियो ।। ताला जन्मे तोड़ ,गयो नंद रे गामड़े । हुवै न थारी होड़ ,कलजुग माही कालिया ।। देवकी रो इ दीकरो, वसुदेव रो इ वंश। आठम कृष्णा आवियो, कूटण मामो कंश ।। रावण रोल्यो लंक रो , रूड़े धनुधर राम। कूटण मामे कंस ने, सजधज आयो श्याम।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण धेनां टोले धोलकी,बंशी मधुर बजाय । लुकै लुगड़ा लुकाय ,कालिन्दी तट कालियो ।। कल कल करती कालिँदी ,मधरा कहुकै मोर । घिरे देख घन घोर ,कोड करे जद कालियो ।। हालिया आय हिरणिया ,टणकी सुणते टेर । मांडै डग डग मेर ,कला ग़ज़ब री कालियो ।। नाथण नकटो नाग ,दरे नाग नाखी दड़ी । झटक्के फणा झाग ,कालिँदी कूद कालियो ।। नट बण नचियो नाच ,फण फुटरा  तें फोड़िया । पूंछ नाग री खांच , कालिँदी बीच  कालियो ।। गोपियां पिँचे गाल ,चोर ठाय चितचोर ने । भल मोर पंख भाल ,कुंवर फुटरो कालिया ।। रमतो लीला रास ,सुर छेड़तोह सांतरा । खामंद तुँही ख़ास ,क़रतो करतब कालिया ।। सोरठा करे शोर ,सब कवियां रा सांतरा । डग डग थामे डोर ,कला करतोह कालिया ।। जलधि पोढया ...

सवाई चूली

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हाई स्कूल   11th - 12th (2004-06) के समय एक सहपाठी मित्र पर चार पंक्तियाँ। बाजी  रा  बे  बोल,  सांभल  सवाई  सांतरा । ठोक फूकण रे ठोल, रेस्टिगेट लिय स्कूल सों।। भाराणी चुलि भोम रो , जोधसीं रो जवान । बाजी री राखी घणी, की की करां बखान।। प्रीतां बाजी पांतरै,  भूले नी पण भीर । सवाइ जैवो हो सखा, व्है जग मांही वीर।। बाजी रै तें कारणे, भूचका किया भचीड़ । उड़ता लेतो तीर तूं , ग्बाग्बाले नै गबीड़ ।। कँठ टांग कारतूसड़ा, बंदे धरि बंदूक। सावल चला सवाइसीं, निसाणो न जा चूक।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

दिवेर युद्ध अर महाराणा प्रताप

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दिवेर युद्ध                      -:दोहा:- गाए गुण गणराज रा, धरे कलमधर ध्यान। सिंवरै माता शारदे , दे दे विद्या दान।। हल्दीघाटी हारकर , देख अकबर दिवेर। सेना काके संगही, भेजी लेवण बैर।। अकबर उगलत आग, मोड़ देख मेवाड़ रो। दागण रो न ले दाग , प्रण ओ लीनो तें पता।। समय अक्टुबर मास ,  पनरे  सौ बंयासि में। मुगला (रा) मोड़े बास, अभियान चला अमरियो  ।। छिप छिप छापामार,  दिवेर घेरे दौड़ता। पल मा करे प्रहार, मैराथन मंड माॅटिड़ा ।। सेना ले सुल्ताण, अलि अलि बकतो आवियो । भालो बाये ताण,   अश्व सहित बींद्यो अमर  ।।  °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण               सुपंखरो मेवाड़ी महाराणा ले तीर कबाणा ले भाला भेला , दौड़ा हय हाक मार हालिया दिवेर। दरबारां सिरदारां  संग जमा रंग राणो घोड़ा असवारां चहुंओरां घाले घेर।।  छलांगां तुरंगां लगातां हिंनहिंनातां करे छोला, छपाक  भीड़िया जोधा क्रोधा ...

ना रूठा कर नार

खटपट कर खामंद सों, ना रूठा कर नार। घणोई हेत घालसी , लाडो लाड लडा'र ।। हेत सो नाहि हालसे , जो महँगाई जा`र । प्रीत रा गीत पांतरो ,(नी तो)भमसो घण भरतार ।। छोरी थांरी छोटकी , बड़ी होसी अबार। मूँडो फाड़े मांगसी, पलीत टिको अपार।। भरतार बटे न भूंगड़ा, पढतां कविता पाठ । मेनत करियां मौकली, ठहसी ठावा ठाठ ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण करती....... कोप, फुरड़तां देख फोनड़ो। तगड़ी आ है तोप, देख सब डरे दीपसा।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण 😂 हर को जोड़े हाथ ,कामण आगे अनवी किसा। नमे त्रिलोकी नाथ ,राधा आगल राजिया । 🙏🏼😃😃

सांवरिया ने ओलभो

पलकां पालनहार , मीच मुलकै मोकलो । निरखे चंचल नार , सुप्रभात झाल सांवरा ।। सिँधुजा दबे सरीर , सैंस सैया सुतो सांतरो । सुणतो नी अब पीर , सासरै पड़यो सांवरो ।। खोले कपाट कान , सांभलो आज ओलभा । मग मग पड.सी मान , पछतासो पछै सांवरा ।। फेड़ले (या) अब्ब तेड़ले , (तु) जाणे तारणहार । देख'र दुखड़ा दीप'सा , लगो(लुगड़ा)चोर रै लार ।। मो मन मन री मार , घट घर घण घुम खावतो । जग तज लुकियो जा'र , सूतो सागर सांवरा ।। दीनां खत मन दूत , बोलां क्यां नी बांचतो । भगतां लागै भूत , सिरकसो कैथ सांवरा ।। ? जा लुक्यो जदुराज , सागर तलेह सीप मा । आलसी भयो आज , संभल जा रे सांवरा ।। ग्वाल गोपियां लाडला , नंदलाल रा नग्ग । एकर सामो आव तो , पटकूं झाल'र पग्ग ।। •••••••••••••••••••••••दीप चारण अलगो अणुतां कोस, कदी अणुतो करीब थूं। कदी देतो हूं कोस, दोष माफ कर सांवरा।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण तारे या ना तार, तनॉ हूं ईज तारतो। याद कर जुग्ग यार,ठीक ठीक सूं ठाकरां।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण भावार्थ -  हे ठाकुर जी! (कृष्ण भगवान ) आप हमें तारो या न तारो आपक...