मायड भाषा ने मानता

कपुत आ किंया पालसी , दे ई किंया आ  साथ ।

मायड म्हारी मावडी , मानता बिन अनाथ ।।

••••••••••••••••••••••••••••दीप चारण

मायङ ने दो मानता , मान बिना (आ) बेजान ।

गीत आ ई गुँजावसी , जय जय राजस्थान ।।

••••••••••••••••••••••••••••••••दीप चारण

Comments

Popular posts from this blog

काम प्रजालन नाच करे। कवि दुला भाई काग कृत

कल्याण शतक रँग कल्ला राठौड़ रो दीप चारण कृत

अपसरा साधना