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Showing posts from July, 2016

सवाई चूली

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हाई स्कूल   11th - 12th (2004-06) के समय एक सहपाठी मित्र पर चार पंक्तियाँ। बाजी  रा  बे  बोल,  सांभल  सवाई  सांतरा । ठोक फूकण रे ठोल, रेस्टिगेट लिय स्कूल सों।। भाराणी चुलि भोम रो , जोधसीं रो जवान । बाजी री राखी घणी, की की करां बखान।। प्रीतां बाजी पांतरै,  भूले नी पण भीर । सवाइ जैवो हो सखा, व्है जग मांही वीर।। बाजी रै तें कारणे, भूचका किया भचीड़ । उड़ता लेतो तीर तूं , ग्बाग्बाले नै गबीड़ ।। कँठ टांग कारतूसड़ा, बंदे धरि बंदूक। सावल चला सवाइसीं, निसाणो न जा चूक।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°

दिवेर युद्ध अर महाराणा प्रताप

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दिवेर युद्ध                      -:दोहा:- गाए गुण गणराज रा, धरे कलमधर ध्यान। सिंवरै माता शारदे , दे दे विद्या दान।। हल्दीघाटी हारकर , देख अकबर दिवेर। सेना काके संगही, भेजी लेवण बैर।। अकबर उगलत आग, मोड़ देख मेवाड़ रो। दागण रो न ले दाग , प्रण ओ लीनो तें पता।। समय अक्टुबर मास ,  पनरे  सौ बंयासि में। मुगला (रा) मोड़े बास, अभियान चला अमरियो  ।। छिप छिप छापामार,  दिवेर घेरे दौड़ता। पल मा करे प्रहार, मैराथन मंड माॅटिड़ा ।। सेना ले सुल्ताण, अलि अलि बकतो आवियो । भालो बाये ताण,   अश्व सहित बींद्यो अमर  ।।  °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण               सुपंखरो मेवाड़ी महाराणा ले तीर कबाणा ले भाला भेला , दौड़ा हय हाक मार हालिया दिवेर। दरबारां सिरदारां  संग जमा रंग राणो घोड़ा असवारां चहुंओरां घाले घेर।।  छलांगां तुरंगां लगातां हिंनहिंनातां करे छोला, छपाक  भीड़िया जोधा क्रोधा ...

ना रूठा कर नार

खटपट कर खामंद सों, ना रूठा कर नार। घणोई हेत घालसी , लाडो लाड लडा'र ।। हेत सो नाहि हालसे , जो महँगाई जा`र । प्रीत रा गीत पांतरो ,(नी तो)भमसो घण भरतार ।। छोरी थांरी छोटकी , बड़ी होसी अबार। मूँडो फाड़े मांगसी, पलीत टिको अपार।। भरतार बटे न भूंगड़ा, पढतां कविता पाठ । मेनत करियां मौकली, ठहसी ठावा ठाठ ।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण करती....... कोप, फुरड़तां देख फोनड़ो। तगड़ी आ है तोप, देख सब डरे दीपसा।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण 😂 हर को जोड़े हाथ ,कामण आगे अनवी किसा। नमे त्रिलोकी नाथ ,राधा आगल राजिया । 🙏🏼😃😃

सांवरिया ने ओलभो

पलकां पालनहार , मीच मुलकै मोकलो । निरखे चंचल नार , सुप्रभात झाल सांवरा ।। सिँधुजा दबे सरीर , सैंस सैया सुतो सांतरो । सुणतो नी अब पीर , सासरै पड़यो सांवरो ।। खोले कपाट कान , सांभलो आज ओलभा । मग मग पड.सी मान , पछतासो पछै सांवरा ।। फेड़ले (या) अब्ब तेड़ले , (तु) जाणे तारणहार । देख'र दुखड़ा दीप'सा , लगो(लुगड़ा)चोर रै लार ।। मो मन मन री मार , घट घर घण घुम खावतो । जग तज लुकियो जा'र , सूतो सागर सांवरा ।। दीनां खत मन दूत , बोलां क्यां नी बांचतो । भगतां लागै भूत , सिरकसो कैथ सांवरा ।। ? जा लुक्यो जदुराज , सागर तलेह सीप मा । आलसी भयो आज , संभल जा रे सांवरा ।। ग्वाल गोपियां लाडला , नंदलाल रा नग्ग । एकर सामो आव तो , पटकूं झाल'र पग्ग ।। •••••••••••••••••••••••दीप चारण अलगो अणुतां कोस, कदी अणुतो करीब थूं। कदी देतो हूं कोस, दोष माफ कर सांवरा।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण तारे या ना तार, तनॉ हूं ईज तारतो। याद कर जुग्ग यार,ठीक ठीक सूं ठाकरां।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण भावार्थ -  हे ठाकुर जी! (कृष्ण भगवान ) आप हमें तारो या न तारो आपक...

मोङो मत कर मेघला

बालक जोवे बाट , टपक पसिनो टपकतो । बरसा बैगी छांट , मोङो मत कर मेघला   ।। आभै बैगो आव , वसुधा ऊपर छावजै । छितरी पडेह छांव , मोङो मत कर मेघला ।। सूखा सरवर सब्ब , प्यासा कूकै पंखिडा । आसाढ भिंजा अब्ब , मोङो मत कर मेघला ।। बरसा दे  बौछार , धधकती भिंजा दे धरा । हरियल कर संसार , मोङो मत कर मेघला ।। घिर घिर घिर घनघोर , उमड घुमड उड आवजै । जमकर बरसे जोर , मोङो मत कर मेघला ।। ••••••••••••••••••••••••दीप चारण