सांवरिये रा सबद

कंस करे घण कोड , देय वसुदेव देवकी । फुटो गगन कन फोड़ ,काल आवसी कालियो ।। ताला जन्मे तोड़ ,गयो नंद रे गामड़े । हुवै न थारी होड़ ,कलजुग माही कालिया ।। देवकी रो इ दीकरो, वसुदेव रो इ वंश। आठम कृष्णा आवियो, कूटण मामो कंश ।। रावण रोल्यो लंक रो , रूड़े धनुधर राम। कूटण मामे कंस ने, सजधज आयो श्याम।। °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°दीप चारण धेनां टोले धोलकी,बंशी मधुर बजाय । लुकै लुगड़ा लुकाय ,कालिन्दी तट कालियो ।। कल कल करती कालिँदी ,मधरा कहुकै मोर । घिरे देख घन घोर ,कोड करे जद कालियो ।। हालिया आय हिरणिया ,टणकी सुणते टेर । मांडै डग डग मेर ,कला ग़ज़ब री कालियो ।। नाथण नकटो नाग ,दरे नाग नाखी दड़ी । झटक्के फणा झाग ,कालिँदी कूद कालियो ।। नट बण नचियो नाच ,फण फुटरा तें फोड़िया । पूंछ नाग री खांच , कालिँदी बीच कालियो ।। गोपियां पिँचे गाल ,चोर ठाय चितचोर ने । भल मोर पंख भाल ,कुंवर फुटरो कालिया ।। रमतो लीला रास ,सुर छेड़तोह सांतरा । खामंद तुँही ख़ास ,क़रतो करतब कालिया ।। सोरठा करे शोर ,सब कवियां रा सांतरा । डग डग थामे डोर ,कला करतोह कालिया ।। जलधि पोढया ...